Bewafa Patni Shayari in Hindi | बेवफा पत्नी शायरी इन हिंदी।

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इस दुनिया में मोहब्बत काश न होती,
तो सफर ऐ-ज़िन्दगी में मिठास न होती,
अगर मिलती बेवफा को सजाए मौत,
तो दीवानों की कब्रे यूँ उदास न होती।

सारी चाहते तेरे लिए
सारे गम मेरे लिए
मेरे हिस्से की तू अधूरी कहानी थी
मैं प्यार का राजा तू बेवफाओ की रानी थी

बेवफा पत्नी शायरी इन हिंदी।

कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी

हमने वक़्त से बहुत वफ़ा की..
लेकिन वक़्त हमसे बेवफ़ाई कर गया…
कुछ तो हमारे नसीब बुरे थे..
कुछ उनका हमसे जी भर गया…

जिंदगी में रुसवाई कर गई
मोहब्बत में बेवफाई कर गई
मैने सदियों तक उसे चाहा
वो किसी और के साथ गुजर गया

हमने चाहा था जिसे उसे दिल से भुलाया न गया,
जख्म अपने दिल का लोगों से छुपाया न गया,
बेवफाई के बाद भी प्यार करता है दिल उनसे,
कि बेवफाई का इल्ज़ाम भी उस पर लगाया न गया।

जिनसे थे मेरे नैन मिले,
बन गए थे ज़िन्दगी के सिलसिले ।
इतना प्यार करने के बाद भी,
सनम मेरे बेवफा निकले।

तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी,
बेवफा मैंने तुझको भुलाया नहीं अभी।

बेवफा पत्नी शायरी।

सौ हिस्से मेरे हो
तब भी हर हिस्से में मुझे पायेगी वो
वफ़ा की दीवार हूं मैं
बेवफा कब तक सितम जाएगी वो

इल्जाम न दे मुझको तूने ही सिखाई बेवफाई है,
देकर के धोखा मुझे मुझको दी रुसवाई है,
मोहब्बत में दिया जो तूने वही अब तू पाएगी,
पछताना छोड़ दे तू भी औरों से धोखा खायेगी।

हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे,
वो भी पल पल हमें आजमाते रहे,
जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया,
हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।

गम तुम्हारा था जी हमने लिया
कसम तुम्हारी थी
पूरा हमने किया
मोहब्बत दोनो की थी
बेवफाई तुमने की वफ़ा हमने किया

मेरा साया भी मुझसे जुदा मिला,
सोचा तो हर किसी से मेरा सिलसिला मिला
शहर-ए-बेवफा में किसे इश्क़-ए-वफ़ा कहें
हमसे गले मिले वो भी बेवफ़ा मिला

Bewafa Patni Shayari in hindi.

हँसी आपकी कोई चुरा ना पाये,
आपको कभी कोई रुला ना पाये,
खुशियों का दीप ऐसे जले ज़िंदगी में..
कि कोई तूफ़ान भी उसे बुझा ना पाये।

दर्द दे गयी, तड़प दे गयी,
जाते जाते गम जुदाई का दे गयी,
साथ देना तेरे बस में नहीं था तो बेवफा
फिर मुझे क्यों ये रुस्वाई दे गयी…

हर भूल तेरी माफ़ की
तेरी हर खता को भुला दिया,
गम है कि मेरे प्यार का
तूने बेवफाई सिला दिया।

तूने ही लगा दिया इलज़ाम-ए-बेवफाई,
अदालत भी तेरी थी गवाह भी तू ही थी।

जिंदगी आशाओं का नाम है
यहां पर सिर्फ झूठों का काम है
जो शक्स दो नाकाम रखे चेहरे पे
बस उसी का इस दुनिया में नाम है

मेरे कलम से लफ्ज़ खो गए शायद
आज वो भी बेवफा हो गाए शायद
जब नींद खुली तो पलकों में पानी था
मेरे ख्वाब मुझ पे रो गाए शायद

Bewafa Patni Shayari

धीरे धीरे दूर होते गए,
वक़्त के आगे मजबूर होते गए,
इश्क़ में हमने ऐसी चोट खाई
हम बेवफा और वो बेक़सूर होते गए

समझ न सके उन्हें हम,
क्योकि हम प्यार के नशे में चूर थे,
अब समझ में आया जिसपे हम जान लुटाते थे,
वो दिल तोड़ने के लिए मशहूर थे!!!

हमारी तबियत भी न जान सके हमे बेहाल देखकर,
और हम कुछ न बता सके उन्हें खुशहाल देखकर।

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