Raat Ki Tanhai Shayari | रात की तन्हाई शायरी

Raat Ki Tanhai Shayari : हेलो दोस्तों आज हम इस पोस्ट में Raat Ki Tanhai Shayari | रात की तन्हाई शायरी लेकर आए हैं जो की आपको बेहद पसंद आएगी और फ्रेंड अगर आपको हमारा यह पोस्ट रात की तन्हाई शायरी पसंद आए तो कमेंट करके जरूर बताइएगा की आपको यह पोस्ट कैसा लगा।

हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,
दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,
ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर,
जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।

[ रात की तन्हाई शायरी ] [ Tanhai Shayari in Hindi ]
[ रात की तन्हाई शायरी ] [ Tanhai Shayari in Hindi ]
तलाश मेरी थी और भटक रहा था वो,
दिल मेरा था और धड़क रहा था वो।
प्यार का ताल्लुक भी अजीब होता है,
आंसू मेरे थे और सिसक रहा था वो।

  1. रात की तन्हाई शायरी

वक़्त नूर को बेनूर कर देता है,
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,
कौन चाहता है अपनों से दूर रहना,
पर वक़्त सबको मजबूर कर देता है।

कुछ फ़ासला नहीं है अदू और शिकस्त में
लेकिन कोई सुराग़ नहीं है गिरफ़्त में

ज़माना जब दरमियाँ हमारे आ बैठा था
तुमसे ही नहीं मैं खुद से भी बिछड़ा था
जुदा हो गए दुःख तो है मगर फिर भी
ग़नीमत है इक-दूजे को बेहद चाहा था।

कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,
चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,
माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,
पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।

समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई,
कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता।

  1. Tanhai Shayari in Hindi

तेरी इक तस्वीर है मेरी आँखों में
और बस यही इक निशानी रखी है
क़ैस-ओ-कोहकन मिटे थे जिस पे
तेरे हुस्न में वही अदा पुरानी रखी है।

चाँद से अपना प्रेम लिखूँ या
निंदिया से अपना बैर लिखूँ.
तुम तो इस दिल के धड़कन हो
फिर तुमको भी कैसे गैर लिखूँ।

फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो,
जिन्दगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो,
जाने किस दिन हो हवायें भी नीलाम यहाँ,
आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो।

कुछ लोग आँखो में रहते हैं,
कुछ लोगों की तस्वीरें नहीं होती।

कोई तो दाग़ मेरे सीने पे सज़ा दो ना
ज़ख्मे-दिल पे ज़रा-सा मुस्कुरा दो ना
बस यही चिंगारी मिटा सकती है मुझे
इसे ज़रा-सी हवा दो ना, भड़का दो ना।

  1. Shayari in Hindi

जरुरी तो नहीं जीने के लिए सहारा हो,
जरुरी तो नहीं हम जिनके हैं वो हमारा हो,
कुछ कश्तियाँ डूब भी जाया करती हैं,
जरुरी तो नहीं हर कश्ती का किनारा हो।

ये हुआ कि रास्ता चुप-चाप कट गया
इतनी सी वारदात की तश्हीर क्या करें

इन आँखों को अब क्या कहें हम
दो प्यालों में शराब पुरानी रखी है
और कुछ नहीं मुझ शायर के पास
तुम पे लुटाने को बस जवानी रखी है।

आज आंखे थोड़ी सी उलझन में है,
उनकी तस्वीर कहती है जाग ले,
ख्वाब कहते है थोड़ी देर सो ले।

अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

  1. तन्हाई शायरी

किसी के बुढ़ापे की लाठी किसी के आंख का तारा हूँ मैं,
फिर उसके बाद ही मेरी जान,तुम्हारा हूँ मैं।

तुमने जब मेरी तरफ़ प्यार से देखा था
मैंने फिर पहरों तेरे बारे में ही सोचा था
रात भर कई दफ़ा मैं सो नहीं पाया था
तेरी याद ने कई दफ़ा इतना सताया था।

जो तीर भी आता वो खाली नहीं जाता,
मायूस मेरे दिल से सवाली नहीं जाता,
काँटे ही किया करते हैं फूलों की हिफाज़त,
फूलों को बचाने कोई माली नहीं जाता।

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